इस अस्पताल में आधी रात के बाद की दास्ता सुनकर आप के रोंगटे खड़े हो जायेगे ,आखिर क्या वजह है की आधी रात के बाद मरीजों की धड़कने बड़ जाति है ,पढिये आखिर क्यों रोने लगा ये सरकारी अस्पताल

loading...

कहते हैं कि भगवान के बाद अगर कोई दूसरा इंसान की जान बचा सकता है तो वह एक डॉक्टर ही है. जैसे भगवान दुआ के साथ इंसान को ठीक करता है वैसे ही डॉक्टर दवा के साथ इंसान को ठीक करने की ताकत रखता है. मगर आज के इस कलयुगी दौर में डॉक्टर भी हैवान बनते जा रहे हैं. जिस अस्पताल का दरवाजा खटखटा कर लोगों को एक उम्मीद की किरण नजर आती है,

वही अस्पताल में मरीजों की जान के दुश्मन बनते जा रहे हैं. कुछ ऐसा ही मामला हाल ही में हमारे सामने आया है. सुकमा जिले के एक अस्पताल मैं 24 घंटे बेहतर इलाज और सुविधा का दावा किया जाता है. मगर यह दवा गलत साबित होता दिखाई दे रहा है. मिली जानकारी के अनुसार सुकमा जिले का यह अस्पताल करोड़ों रुपए की लागत से बना है मगर फिर भी यहां किसी भी मरीज को सुख सुविधा नहीं मिल पा रही है. लोगों के अनुसार आधी रात के समय ज्यादातर डॉक्टर ड्यूटी से गायब रहते हैं जबकि मरीज दर्द में चीते चिल्लाते इधर उधर भटकते रहते हैं. केवल इतना ही नहीं बल्कि कभी कबार तो मरीज को बिना इलाज के ही अस्पताल से वापस घर लौटना पड़ता है.

एक रिपोर्ट के अनुसार बीते बुधवार को देर रात तक अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे. ऐसे में इलाज करवाने के लिए कई मरीज आए और गए लेकिन कोई डॉक्टर वहां नहीं आया. इस बात की जानकारी किसी व्यक्ति ने एसडीएम और सिविल सर्जन को मोबाइल पर भेज दी. जिसके बाद अस्पताल में डॉक्टर की व्यवस्था की गई.

इसी अस्पताल में इलाज करवाने वालों में से एक महिला जो कि अपनी बच्ची के साथ रात साढ़े आठ के करीब अस्पताल पहुंची थी, उस ने बताया कि 13 दिसंबर को रात 8:00 से लेकर 10:00 बजे तक अस्पताल में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था और सभी मरीज बहुत दर्द से कराह रहे थे. ऐसा माहौल देखकर उस महिला को अस्पताल से बिना इलाज के ही वापस घर लौटना पड़ा. इसके इलावा महिला के अनुसार नाइट शिफ्ट में कोई स्टाफ नर्स भी नहीं थी. महिला ने बताया कि रात में दो-तीन घंटे में एक बार नर्स देख कर चले जाती है. जिसके बाद उसने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को फोन करने का प्रयास किया लेकिन उसका संपर्क नहीं हो पाया.

मिली जानकारी के अनुसार एआईएसएफ छात्र संघ के नेता राजेश नाथ के अनुसार सरकार 14 साल के जश्न में डूबी हुई है. सरकार की इस गैरजिम्मेदाराना हरकत का खामियाजा वहां के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है. ऐसे ही बुधवार की रात को भी जिला अस्पताल में कोई भी डॉक्टर या नर्स मौजूद नहीं थे जिसके कारण वहां मौजूद सभी मरीज काफी परेशान दिख रहे थे. इस बात की जानकारी मिलने के बाद SDM सुकमा एवं सिविल सर्जन ने अस्पताल डॉक्टर पहुंचाकर इलाज शुरू करवा दिए.

अस्पताल में रह रहे मलेरिया पीड़ित अशोक कश्यप का कहना है कि मलेरिया होने के कारण उसकी तबीयत शाम को 7:30 बजे काफी बिगड़ गई थी. जिसके बाद वह डॉक्टर से इलाज करवाने के लिए इस अस्पताल पहुंच गया. अशोक ने बताया कि 7:30 से लेकर रात के 10:30 बजे तक वहां कोई डॉक्टर नहीं था जो उसका इलाज कर पाता. समय पर डॉक्टर ना मिलने के कारण उसको काफी दर्द का सामना करना पड़ा. ऐसे में किसी मरीज को आपातकालीन मदद चाहिए होगी तो कोई भी वहां उसकी मदद के लिए मौजूद नही होगा.

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि अस्पताल का क्षेत्र काफी संवेदनशील है जिसके कारण बड़ी अनहोनी होने की संभावना बनी रहती है. परंतु इन सब के बावजूद भी अस्पताल में डॉक्टर और नर्स का मौजूद ना रहना मरीजों के लिए जानलेवा सिद्ध हो सकता है. अस्पताल में मरीजों को 24 घंटे सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए जबकि इस अस्पताल में ऐसा कुछ भी नहीं मिल रहा।

Loading...